Updated 2026
अम्ल वर्षा (Acid Rain) क्या है? कारण, प्रभाव, नियंत्रण एवं भारत में स्थिति
आज के औद्योगिक युग में पर्यावरण प्रदूषण की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है अम्ल वर्षा (Acid Rain)। यह केवल वर्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी, जल, वनस्पति, इमारतों और मानव स्वास्थ्य तक को प्रभावित करती है। यह लेख अम्ल वर्षा को वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से पूर्ण रूप से समझाता है।
विषय सूची (Table of Contents)
- अम्ल वर्षा की परिभाषा
- अम्ल वर्षा की खोज
- अम्ल वर्षा की रासायनिक प्रक्रिया
- अम्ल वर्षा के प्रकार
- अम्ल वर्षा के कारण
- अम्ल वर्षा के प्रभाव
- भारत में अम्ल वर्षा
- अम्ल वर्षा की रोकथाम एवं नियंत्रण
- परीक्षा उपयोगी बिंदु
- FAQs
अम्ल वर्षा की परिभाषा
जब वायुमंडल में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) जलवाष्प, ऑक्सीजन और अन्य रसायनों के साथ प्रतिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) एवं नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) बनाते हैं और ये वर्षा, हिमपात, कुहासा या धूल के रूप में पृथ्वी पर गिरते हैं, तो इसे अम्ल वर्षा कहते हैं।
सामान्य वर्षा का pH लगभग 5.6 होता है, जबकि अम्ल वर्षा का pH 4.0 से 2.5 तक हो सकता है।
अम्ल वर्षा की खोज
अम्ल वर्षा की अवधारणा सर्वप्रथम 1852 में रॉबर्ट एंगस स्मिथ (Robert Angus Smith) द्वारा दी गई। उन्होंने औद्योगिक शहरों में होने वाली वर्षा को रासायनिक रूप से अम्लीय पाया।
अम्ल वर्षा की रासायनिक प्रक्रिया
सल्फर चक्र:
SO₂ + O₂ → SO₃
SO₃ + H₂O → H₂SO₄ (सल्फ्यूरिक अम्ल)
नाइट्रोजन चक्र:
NO₂ + H₂O → HNO₃ (नाइट्रिक अम्ल)
ये अम्ल बादलों में घुलकर पृथ्वी की सतह पर गिरते हैं।
अम्ल वर्षा के प्रकार
1. गीली अम्ल वर्षा (Wet Deposition)
जब अम्लीय वर्षा, हिमपात, ओले या कुहासा सीधे पृथ्वी पर गिरते हैं।
2. शुष्क अम्ल वर्षा (Dry Deposition)
जब अम्लीय कण धूल या गैस के रूप में सतह पर जम जाते हैं और बाद में नमी मिलने पर अम्ल बनाते हैं।
अम्ल वर्षा के प्रमुख कारण
- कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र
- पेट्रोल-डीजल वाहन
- औद्योगिक धुआँ
- तेल शोधन संयंत्र
- थर्मल पावर प्लांट
- ज्वालामुखीय विस्फोट (प्राकृतिक कारण)
अम्ल वर्षा के प्रभाव
1. जल स्रोतों पर प्रभाव
झीलों और नदियों का pH घटने से मछलियाँ, मेंढक और जलीय जीव नष्ट हो जाते हैं।
2. मृदा पर प्रभाव
मिट्टी से कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व निकल जाते हैं, जिससे भूमि बंजर होती है।
3. वनस्पति पर प्रभाव
पत्तियों को क्षति पहुँचती है, प्रकाश संश्लेषण बाधित होता है और वन नष्ट होते हैं।
4. मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव
अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के रोग और आँखों में जलन की समस्या बढ़ती है।
5. ऐतिहासिक इमारतों पर प्रभाव
ताजमहल, संगमरमर की मूर्तियाँ और स्मारक धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होते हैं।
भारत में अम्ल वर्षा की स्थिति
भारत में कोयला आधारित ऊर्जा उत्पादन और तीव्र औद्योगिकीकरण के कारण दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे शहरों में अम्ल वर्षा की संभावना अधिक है।
ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) अम्ल वर्षा से ताजमहल की रक्षा हेतु बनाया गया।
अम्ल वर्षा की रोकथाम एवं नियंत्रण उपाय
- स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन) का उपयोग
- वाहनों में कैटेलिटिक कनवर्टर
- कम सल्फर युक्त ईंधन
- वनीकरण (Afforestation)
- उद्योगों में स्क्रबर तकनीक
परीक्षा उपयोगी बिंदु
- अम्ल वर्षा का pH: 4.0 या उससे कम
- खोजकर्ता: रॉबर्ट एंगस स्मिथ
- मुख्य अम्ल: H₂SO₄ और HNO₃
- मुख्य स्रोत: थर्मल पावर प्लांट
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या अम्ल वर्षा केवल वर्षा के रूप में होती है?
नहीं, यह कुहासा, हिमपात और धूल के रूप में भी हो सकती है।
प्रश्न 2: अम्ल वर्षा सबसे अधिक किस पर प्रभाव डालती है?
जल स्रोत, वनस्पति और ऐतिहासिक स्मारक।
प्रश्न 3: क्या अम्ल वर्षा रोकी जा सकती है?
हाँ, प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ ऊर्जा से।