RRB JE MCQ : Amplifier and Oscillator RRB JE Ke liye

Amplifier और Oscillator | RRB JE Electronics Complete Notes & MCQs

Amplifier और Oscillator – RRB JE Electronics के लिए Complete Notes, Formulas और MCQs

Amplifier और Oscillator इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के सबसे high-weightage टॉपिक्स में से एक हैं, खासकर RRB JE Electronics परीक्षा के लिए। हर साल इन दोनों टॉपिक्स से direct conceptual + numerical MCQs पूछे जाते हैं।


इस पोस्ट में आपको Amplifier और Oscillator की पूरी जानकारी basic से advanced level तक मिलेगी — जैसे: types, working principle, important formulas, Barkhausen criterion, comparison table और 20 exam-oriented MCQs


यह कंटेंट खासतौर पर RRB JE, SSE, Technician और अन्य Electronics competitive exams को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि आप concept clear + exam ready दोनों बन सकें।

1. एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर का परिचय

एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणालियों की रीढ़ हैं, जो आरआरबी जेई (रेलवे भर्ती बोर्ड जूनियर इंजीनियर) परीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। ये मौलिक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट रेडियो ट्रांसमीटर और रिसीवर से लेकर डिजिटल उपकरणों और माप उपकरणों तक विभिन्न अनुप्रयोगों में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

एक एम्प्लीफायर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो किसी सिग्नल की शक्ति बढ़ाता है, जबकि एक ऑसिलेटर एक सर्किट है जो निरंतर, दोहराव वाला तरंग रूप उत्पन्न करता है। आरआरबी जेई परीक्षा में, इन विषयों से प्रत्येक वर्ष कई प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. एम्प्लीफायर क्या हैं?

एक एम्प्लीफायर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो किसी इनपुट सिग्नल की शक्ति (वोल्टेज, करंट, या दोनों) बढ़ाता है। यह बाहरी शक्ति स्रोत (जैसे बैटरी या पावर सप्लाई) का उपयोग करके सिग्नल की ताकत बढ़ाता है।

एम्प्लीफायर के मूल सिद्धांत:

एम्प्लीफायर छोटे इनपुट सिग्नल को लेता है और इसे एक बड़े आउटपुट सिग्नल में परिवर्तित करता है, जिसमें इनपुट सिग्नल के आवश्यक गुण (जैसे आवृत्ति और तरंग आकार) संरक्षित रहते हैं।

आरआरबी जेई के लिए महत्वपूर्ण: एम्प्लीफायर के कार्य करने के लिए, इसे सक्रिय उपकरणों (ट्रांजिस्टर, ऑप-एम्प, आदि) की आवश्यकता होती है जो बाहरी डीसी शक्ति का उपयोग करते हैं।

3. एम्प्लीफायर के प्रकार

3.1 कार्यप्रणाली के आधार पर वर्गीकरण:

प्रकार विवरण दक्षता उपयोग
क्लास A पूरे इनपुट साइकल के दौरान आउटपुट करंट प्रवाहित होता है 25-30% ऑडियो एम्प्लीफायर, कम शक्ति अनुप्रयोग
क्लास B इनपुट साइकल के आधे हिस्से के दौरान आउटपुट करंट प्रवाहित होता है 70-80% ऑडियो पावर एम्प्लीफायर
क्लास AB क्लास A और B का संकर; 50% से अधिक साइकल 50-70% ऑडियो एम्प्लीफायर, रेडियो फ्रीक्वेंसी
क्लास C इनपुट साइकल के 50% से कम के दौरान आउटपुट करंट 85% तक RF एम्प्लीफायर, ऑसिलेटर
क्लास D स्विचिंग एम्प्लीफायर, PWM का उपयोग करता है 90% से अधिक ऑडियो एम्प्लीफायर, सबवूफर

3.2 आवृत्ति प्रतिक्रिया के आधार पर:

  • डीसी एम्प्लीफायर: 0 Hz से शुरू होने वाली आवृत्तियों को प्रवर्धित करता है
  • ऑडियो फ्रीक्वेंसी एम्प्लीफायर: 20 Hz से 20 kHz तक
  • वाइडबैंड एम्प्लीफायर: कई मेगाहर्ट्ज तक की आवृत्तियों को कवर करता है
  • RF एम्प्लीफायर: रेडियो फ्रीक्वेंसी (कुछ kHz से कई GHz तक)

4. एम्प्लीफायर पैरामीटर और विशेषताएं

वोल्टेज लाभ (Av) = Vout / Vin
करंट लाभ (Ai) = Iout / Iin
पावर लाभ (Ap) = Pout / Pin = Av × Ai

महत्वपूर्ण पैरामीटर:

पैरामीटर परिभाषा महत्व
इनपुट प्रतिबाधा एम्प्लीफायर द्वारा इनपुट स्रोत को प्रस्तुत प्रतिबाधा स्रोत से अधिकतम शक्ति स्थानांतरण
आउटपुट प्रतिबाधा एम्प्लीफायर द्वारा लोड को प्रस्तुत प्रतिबाधा लोड को अधिकतम शक्ति स्थानांतरण
बैंडविड्थ आवृत्ति की सीमा जिस पर एम्प्लीफायर संतोषजनक रूप से काम करता है सिग्नल विरूपण निर्धारित करता है
विकृति आउटपुट सिग्नल में इनपुट सिग्नल से विचलन सिग्नल गुणवत्ता निर्धारित करता है

5. ऑसिलेटर क्या हैं?

एक ऑसिलेटर एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है जो बिना किसी बाहरी इनपुट सिग्नल के निरंतर, आवधिक, दोलनशील तरंग उत्पन्न करता है। यह डीसी शक्ति को एसी शक्ति में परिवर्तित करता है।

बार्कहाउजन मानदंड (ऑसिलेशन के लिए आवश्यक शर्तें):

  1. लूप लाभ ≥ 1: पूरे फीडबैक लूप का लाभ कम से कम एक होना चाहिए
  2. लूप फेज शिफ्ट = 0° या 360°: इनपुट और आउटपुट के बीच कुल फेज शिफ्ट शून्य या 360 डिग्री का पूर्णांक गुणक होना चाहिए

आरआरबी जेई टिप: बार्कहाउजन मानदंड ऑसिलेटर के संचालन के लिए आवश्यक और पर्याप्त शर्तें प्रदान करता है। यह परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

6. ऑसिलेटर के प्रकार

6.1 आउटपुट तरंग के आधार पर:

  • साइनसॉइडल ऑसिलेटर: साइन तरंग उत्पन्न करते हैं
    • एलसी ऑसिलेटर (हार्टले, कोल्पिट्स)
    • आरसी ऑसिलेटर (फेज-शिफ्ट, वीन ब्रिज)
    • क्रिस्टल ऑसिलेटर
  • नॉन-साइनसॉइडल ऑसिलेटर: स्क्वायर, ट्रायंगल, सॉटूथ तरंग उत्पन्न करते हैं
    • मल्टीवाइब्रेटर (एस्टेबल, मोनोस्टेबल, बिस्टेबल)
    • रिलैक्सेशन ऑसिलेटर

6.2 महत्वपूर्ण ऑसिलेटर सर्किट:

ऑसिलेटर आवृत्ति सूत्र उपयोग
हार्टले ऑसिलेटर f = 1/[2π√(LeqC)] RF अनुप्रयोग, रेडियो रिसीवर
कोल्पिट्स ऑसिलेटर f = 1/[2π√(LCeq)] उच्च आवृत्ति जनरेटर
फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर f = 1/(2πRC√6) ऑडियो आवृत्ति जनरेशन
वीन ब्रिज ऑसिलेटर f = 1/(2πRC) ऑडियो और सब-ऑडियो आवृत्ति
क्रिस्टल ऑसिलेटर क्रिस्टल की प्राकृतिक आवृत्ति पर निर्भर सटीक और स्थिर आवृत्ति स्रोत

7. एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर में तुलना

पैरामीटर एम्प्लीफायर ऑसिलेटर
क्रिया सिग्नल की शक्ति बढ़ाता है सिग्नल उत्पन्न करता है
इनपुट आवश्यकता बाहरी इनपुट सिग्नल की आवश्यकता कोई बाहरी इनपुट सिग्नल नहीं
फीडबैक आमतौर पर नेगेटिव फीडबैक हमेशा पॉजिटिव फीडबैक
आउटपुट इनपुट सिग्नल का प्रवर्धित संस्करण आवधिक तरंग (साइन, स्क्वायर, आदि)
बार्कहाउजन मानदंड लागू नहीं लागू (लूप गेन ≥ 1, फेज शिफ्ट = 0°)

याद रखें: एक ऑसिलेटर अनिवार्य रूप से एक एम्प्लीफायर है जिसमें उचित फीडबैक जोड़ा गया है। सभी ऑसिलेटर एम्प्लीफायर होते हैं, लेकिन सभी एम्प्लीफायर ऑसिलेटर नहीं होते हैं।

8. इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार में अनुप्रयोग

एम्प्लीफायर के अनुप्रयोग:

  • ऑडियो सिस्टम: स्पीकर, हेडफोन, माइक्रोफोन
  • संचार प्रणाली: रेडियो, टेलीविजन, सेल फोन
  • मेडिकल उपकरण: ECG, EEG मशीन
  • मापन उपकरण: ऑसिलोस्कोप, सिग्नल जनरेटर
  • रडार सिस्टम: सिग्नल प्रोसेसिंग

ऑसिलेटर के अनुप्रयोग:

  • क्लॉक सिग्नल: कंप्यूटर, माइक्रोकंट्रोलर
  • संचार प्रणाली: कैरियर सिग्नल जनरेशन
  • मेडिकल उपकरण: पेसमेकर, अल्ट्रासाउंड मशीन
  • मापन उपकरण: फंक्शन जनरेटर, फ्रीक्वेंसी काउंटर
  • रिमोट कंट्रोल: टीवी, एसी, कार की चाबी

9. आरआरबी जेई प्रश्न पैटर्न (इलेक्ट्रॉनिक्स/इंस्ट्रुमेंटेशन)

आरआरबी जेई परीक्षा में, एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर से संबंधित प्रश्न निम्नलिखित क्षेत्रों से पूछे जाते हैं:

  • बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs): 1-2 अंक के
  • प्रायोगिक प्रश्न: सर्किट डायग्राम, कार्यप्रणाली
  • गणना आधारित प्रश्न: लाभ, आवृत्ति, बैंडविड्थ
  • तुलनात्मक प्रश्न: विभिन्न प्रकार के एम्प्लीफायर/ऑसिलेटर

परीक्षा रणनीति: एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर से प्रत्येक वर्ष औसतन 4-6 प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्गीकरण, कार्यप्रणाली और महत्वपूर्ण सूत्रों पर ध्यान केंद्रित करें।

10. महत्वपूर्ण सूत्र और गणना

एम्प्लीफायर सूत्र:

वोल्टेज लाभ (dB में) = 20 log10(Vout/Vin)
पावर लाभ (dB में) = 10 log10(Pout/Pin)
दक्षता (%) = (Pout / Pdc) × 100

ऑसिलेटर सूत्र:

दोलन आवृत्ति: f = 1/(2π√(LC)) [LC ऑसिलेटर के लिए]
फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर: f = 1/(2πRC√(2N)) [N चरणों के लिए]
क्रिस्टल ऑसिलेटर: f = 1/(2π√(LsCs))

याद करने की ट्रिक: "2π√LC" एलसी ऑसिलेटर की दोलन आवृत्ति का सूत्र है। आरसी ऑसिलेटर के लिए, सूत्र में आमतौर पर "2πRC" शामिल होता है।

11. आरआरबी जेई के लिए 20 अभ्यास MCQs

1. क्लास A एम्प्लीफायर की अधिकतम सैद्धांतिक दक्षता क्या है?

a) 25%
b) 50%
c) 78.5%
d) 100%

उत्तर: b) 50%

व्याख्या: क्लास A एम्प्लीफायर की अधिकतम सैद्धांतिक दक्षता ट्रांसफॉर्मर-युग्मित लोड के लिए 50% और प्रतिरोधक लोड के लिए 25% होती है। यह कम दक्षता इस तथ्य के कारण है कि ट्रांजिस्टर पूरे इनपुट चक्र के दौरान संचालित होता है, जिससे निरंतर शक्ति अपव्यय होता है।

2. बार्कहाउजन मानदंड के अनुसार, दोलन के लिए आवश्यक शर्तें क्या हैं?

a) लूप लाभ ≥ 1 और लूप फेज शिफ्ट = 0°
b) लूप लाभ ≤ 1 और लूप फेज शिफ्ट = 90°
c) लूप लाभ = 1 और लूप फेज शिफ्ट = 180°
d) लूप लाभ > 1 और लूप फेज शिफ्ट = 360°

उत्तर: a) लूप लाभ ≥ 1 और लूप फेज शिफ्ट = 0°

व्याख्या: बार्कहाउजन मानदंड के अनुसार, एक सर्किट के दोलन करने के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं: (1) लूप लाभ कम से कम 1 होना चाहिए (|Aβ| ≥ 1), और (2) लूप के चारों ओर कुल फेज शिफ्ट 0° या 360° का पूर्णांक गुणक होना चाहिए।

3. निम्नलिखित में से कौन सा ऑसिलेटर सबसे स्थिर आवृत्ति प्रदान करता है?

a) हार्टले ऑसिलेटर
b) कोल्पिट्स ऑसिलेटर
c) क्रिस्टल ऑसिलेटर
d) फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर

उत्तर: c) क्रिस्टल ऑसिलेटर

व्याख्या: क्रिस्टल ऑसिलेटर क्वार्ट्ज क्रिस्टल के यांत्रिक अनुनाद का उपयोग करते हैं, जो उच्च Q-कारक (10,000 से 1,000,000 तक) प्रदान करता है। यह उच्च Q-कारक तापमान, आपूर्ति वोल्टेज और भार परिवर्तन के प्रति कम संवेदनशीलता के साथ अत्यधिक स्थिर और सटीक आवृत्ति उत्पन्न करता है।

4. पुश-पुल एम्प्लीफायर आमतौर पर किस वर्ग में संचालित होता है?

a) क्लास A
b) क्लास B
c) क्लास C
d) क्लास D

उत्तर: b) क्लास B

व्याख्या: पुश-पुल एम्प्लीफायर आमतौर पर क्लास B या क्लास AB मोड में संचालित होते हैं। क्लास B ऑपरेशन में, दो ट्रांजिस्टर का उपयोग किया जाता है, प्रत्येक इनपुट साइन वेव के आधे हिस्से के लिए संचालित होता है। यह व्यवस्था क्रॉसओवर विरूपण को कम करते हुए उच्च दक्षता प्रदान करती है।

5. वीन ब्रिज ऑसिलेटर में दोलन की आवृत्ति किसके द्वारा दी जाती है?

a) f = 1/(2π√LC)
b) f = 1/(2πRC)
c) f = 1/(RC√6)
d) f = 1/(2π√(L/C))

उत्तर: b) f = 1/(2πRC)

व्याख्या: वीन ब्रिज ऑसिलेटर में, जब R1 = R2 = R और C1 = C2 = C, तो दोलन की आवृत्ति f = 1/(2πRC) द्वारा दी जाती है। वीन ब्रिज ऑसिलेटर का उपयोग आमतौर पर ऑडियो आवृत्ति रेंज (20 Hz से 20 kHz) में साइन तरंगें उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

6. किस प्रकार का एम्प्लीफायर पल्स विड्थ मॉड्यूलेशन (PWM) का उपयोग करता है?

a) क्लास A
b) क्लास B
c) क्लास C
d) क्लास D

उत्तर: d) क्लास D

व्याख्या: क्लास D एम्प्लीफायर, जिसे स्विचिंग एम्प्लीफायर भी कहा जाता है, पल्स विड्थ मॉड्यूलेशन (PWM) तकनीक का उपयोग करता है। इनपुट सिग्नल को उच्च आवृत्ति वाले स्क्वायर वेव में मॉड्यूलेट किया जाता है, जिसे फिर फिल्टर किया जाता है ताकि आउटपुट पर प्रवर्धित सिग्नल पुनः प्राप्त हो सके। यह दृष्टिकोण बहुत उच्च दक्षता (90% से अधिक) प्रदान करता है।

7. निम्नलिखित में से कौन सा ऑसिलेटर नॉन-साइनसॉइडल आउटपुट उत्पन्न करता है?

a) हार्टले ऑसिलेटर
b) कोल्पिट्स ऑसिलेटर
c) एस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर
d) वीन ब्रिज ऑसिलेटर

उत्तर: c) एस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर

व्याख्या: एस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर, जिसे फ्री-रनिंग मल्टीवाइब्रेटर भी कहा जाता है, एक नॉन-साइनसॉइडल ऑसिलेटर है जो स्क्वायर वेव या आयताकार तरंग उत्पन्न करता है। इसका उपयोग क्लॉक सिग्नल, टाइमिंग सिग्नल और फ्लैशर सर्किट में किया जाता है।

8. एक एम्प्लीफायर का वोल्टेज लाभ 40 dB है। यदि इनपुट वोल्टेज 10 mV है, तो आउटपुट वोल्टेज क्या है?

a) 100 mV
b) 1 V
c) 10 V
d) 100 V

उत्तर: b) 1 V

व्याख्या: वोल्टेज लाभ (dB में) = 20 log10(Vout/Vin)
40 = 20 log10(Vout/0.01)
2 = log10(Vout/0.01)
102 = Vout/0.01
Vout = 100 × 0.01 = 1 V

9. फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर में, यदि R = 10 kΩ और C = 0.01 μF, तो दोलन आवृत्ति क्या है? (तीन-चरण के लिए)

a) 159 Hz
b) 650 Hz
c) 1.3 kHz
d) 6.5 kHz

उत्तर: b) 650 Hz

व्याख्या: तीन-चरण फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर के लिए: f = 1/(2πRC√6)
R = 10 × 103 Ω, C = 0.01 × 10-6 F
f = 1/(2π × 104 × 10-8 × √6)
f = 1/(2π × 10-4 × 2.449) = 1/(1.538 × 10-3) ≈ 650 Hz

10. किस प्रकार के एम्प्लीफायर में आउटपुट सिग्नल इनपुट सिग्नल के समान फेज में होता है?

a) कॉमन एमिटर
b) कॉमन बेस
c) कॉमन कलेक्टर
d) इनवर्टिंग ऑप-एम्प

उत्तर: c) कॉमन कलेक्टर

व्याख्या: कॉमन कलेक्टर कॉन्फ़िगरेशन, जिसे एमिटर फॉलोअर भी कहा जाता है, में आउटपुट सिग्नल (एमिटर पर) इनपुट सिग्नल (बेस पर) के साथ फेज में होता है। इसका वोल्टेज लाभ लगभग 1 होता है, लेकिन इसका करंट लाभ और पावर लाभ महत्वपूर्ण होता है। यह उच्च इनपुट प्रतिबाधा और कम आउटपुट प्रतिबाधा प्रदान करता है।

11. किस प्रकार के ऑसिलेटर में दो इंडक्टर और एक कैपेसिटर होता है?

a) कोल्पिट्स ऑसिलेटर
b) हार्टले ऑसिलेटर
c) क्रिस्टल ऑसिलेटर
d) फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर

उत्तर: b) हार्टले ऑसिलेटर

व्याख्या: हार्टले ऑसिलेटर में टैंक सर्किट के रूप में दो इंडक्टर (श्रृंखला में) और एक कैपेसिटर (समानांतर में) होता है। दोलन आवृत्ति f = 1/[2π√(LeqC)] द्वारा दी जाती है, जहाँ Leq दो इंडक्टरों का कुल अधिष्ठापन है।

12. 20 dB पावर लाभ वाले एम्प्लीफायर का पावर अनुपात क्या है?

a) 10
b) 20
c) 100
d) 1000

उत्तर: c) 100

व्याख्या: पावर लाभ (dB में) = 10 log10(Pout/Pin)
20 = 10 log10(Pout/Pin)
2 = log10(Pout/Pin)
Pout/Pin = 102 = 100
इसलिए, पावर अनुपात 100 है, जिसका अर्थ है कि आउटपुट पावर इनपुट पावर से 100 गुना अधिक है।

13. क्लास C एम्प्लीफायर का उपयोग आमतौर पर कहाँ किया जाता है?

a) ऑडियो एम्प्लीफायर
b) RF एम्प्लीफायर
c) ऑपरेशनल एम्प्लीफायर
d) इंस्ट्रूमेंटेशन एम्प्लीफायर

उत्तर: b) RF एम्प्लीफायर

व्याख्या: क्लास C एम्प्लीफायर का उपयोग मुख्य रूप से रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर में किया जाता है क्योंकि उनकी उच्च दक्षता (85% तक) होती है। हालाँकि, उनमें उच्च विरूपण होता है, इसलिए उनका उपयोग केवल अनुनाद सर्किट के साथ किया जाता है जो मौलिक आवृत्ति को फ़िल्टर कर सकते हैं।

14. निम्नलिखित में से कौन सा ऑसिलेटर नेगेटिव रेजिस्टेंस सिद्धांत पर काम करता है?

a) हार्टले ऑसिलेटर
b) टनेल डायोड ऑसिलेटर
c) फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर
d) वीन ब्रिज ऑसिलेटर

उत्तर: b) टनेल डायोड ऑसिलेटर

व्याख्या: टनेल डायोड ऑसिलेटर नेगेटिव रेजिस्टेंस सिद्धांत पर काम करता है। टनेल डायोड में अपने वोल्टेज-करंट विशेषता के एक भाग में नकारात्मक प्रतिरोध होता है। जब एक उपयुक्त टैंक सर्किट से जोड़ा जाता है, तो यह नकारात्मक प्रतिरोध टैंक सर्किट में ऊर्जा हानि की भरपाई कर सकता है, जिससे दोलन हो सकते हैं।

15. एक एम्प्लीफायर का इनपुट प्रतिबाधा 1 kΩ है और आउटपुट प्रतिबाधा 100 Ω है। यह किस प्रकार के एम्प्लीफायर को इंगित करता है?

a) वोल्टेज एम्प्लीफायर
b) करंट एम्प्लीफायर
c) ट्रांसरजिस्टेंस एम्प्लीफायर
d) ट्रांसकंडक्टेंस एम्प्लीफायर

उत्तर: a) वोल्टेज एम्प्लीफायर

व्याख्या: उच्च इनपुट प्रतिबाधा और कम आउटपुट प्रतिबाधा वाला एम्प्लीफायर वोल्टेज एम्प्लीफायर की विशेषता है। उच्च इनपुट प्रतिबाधा स्रोत पर न्यूनतम लोडिंग सुनिश्चित करती है, जबकि कम आउटपुट प्रतिबाधा लोड को अधिकतम शक्ति स्थानांतरण की अनुमति देती है।

16. कौन सा ऑसिलेटर विभिन्न आवृत्तियों को जनरेट करने के लिए जाना जाता है जो एक-दूसरे के हार्मोनिक्स हैं?

a) हार्टले ऑसिलेटर
b) कोल्पिट्स ऑसिलेटर
c) क्रिस्टल ऑसिलेटर
d) फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर

उत्तर: c) क्रिस्टल ऑसिलेटर

व्याख्या: क्रिस्टल ऑसिलेटर विभिन्न हार्मोनिक आवृत्तियों पर दोलन कर सकते हैं। क्वार्ट्ज क्रिस्टल में कई प्राकृतिक अनुनाद आवृत्तियाँ होती हैं: मौलिक आवृत्ति और विषम हार्मोनिक्स (तीसरा, पाँचवाँ, आदि)। इन हार्मोनिक आवृत्तियों का उपयोग उच्च आवृत्ति दोलन उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है।

17. एक एम्प्लीफायर में 3 dB बैंडविड्थ का क्या अर्थ है?

a) वह आवृत्ति रेंज जहां लाभ अधिकतम का 50% होता है
b) वह आवृत्ति रेंज जहां लाभ अधिकतम का 70.7% होता है
c) वह आवृत्ति रेंज जहां लाभ अधिकतम का 90% होता है
d) वह आवृत्ति रेंज जहां लाभ स्थिर होता है

उत्तर: b) वह आवृत्ति रेंज जहां लाभ अधिकतम का 70.7% होता है

व्याख्या: 3 dB बैंडविड्थ को आवृत्तियों की सीमा के रूप में परिभाषित किया जाता है जिस पर एम्प्लीफायर का लाभ अधिकतम लाभ के 70.7% (या 1/√2) से अधिक होता है। डेसीबल पैमाने पर, 3 dB कमी पावर में आधी कमी के अनुरूप होती है (10 log10(0.5) ≈ -3 dB)।

18. निम्नलिखित में से कौन सा ऑसिलेटर LC टैंक सर्किट का उपयोग नहीं करता है?

a) हार्टले ऑसिलेटर
b) कोल्पिट्स ऑसिलेटर
c) फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर
d) क्लैप ऑसिलेटर

उत्तर: c) फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर

व्याख्या: फेज-शिफ्ट ऑसिलेटर RC नेटवर्क का उपयोग करता है, LC टैंक सर्किट का नहीं। इसमें तीन RC चरण होते हैं जो कुल 180° फेज शिफ्ट प्रदान करते हैं, और ट्रांजिस्टर 180° का अतिरिक्त फेज शिफ्ट प्रदान करता है, जिससे बार्कहाउजन मानदंड को पूरा करने के लिए कुल 360° फेज शिफ्ट होता है।

19. क्लास AB एम्प्लीफायर में क्रॉसओवर विरूपण को कैसे कम किया जाता है?

a) उच्च आपूर्ति वोल्टेज का उपयोग करके
b) नेगेटिव फीडबैक लागू करके
c) ट्रांजिस्टर को थोड़ा चालू रखकर
d) आउटपुट फ़िल्टर का उपयोग करके

उत्तर: c) ट्रांजिस्टर को थोड़ा चालू रखकर

व्याख्या: क्लास AB एम्प्लीफायर में, क्रॉसओवर विरूपण को कम करने के लिए ट्रांजिस्टर को एक छोटे बायस करंट के साथ थोड़ा चालू रखा जाता है, जिससे वह कटऑफ मोड के करीब काम करते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि जब एक ट्रांजिस्टर बंद होना शुरू होता है, तो दूसरा पहले से ही चालू होता है, जिससे आउटपुट सिग्नल में कोई अंतराल नहीं होता है।

20. एक ऑसिलेटर 1 MHz की आवृत्ति उत्पन्न करता है। यदि क्रिस्टल की मोटाई 10% कम कर दी जाती है, तो नई आवृत्ति क्या होगी?

a) 0.9 MHz
b) 1 MHz
c) 1.1 MHz
d) 1.2 MHz

उत्तर: c) 1.1 MHz

व्याख्या: क्वार्ट्ज क्रिस्टल की अनुनाद आवृत्ति इसकी मोटाई के व्युत्क्रमानुपाती होती है। यदि मोटाई 10% कम हो जाती है (मूल का 90%), तो आवृत्ति 1/0.9 = 1.111 गुना बढ़ जाती है। इसलिए, नई आवृत्ति = 1 MHz × 1.111 ≈ 1.11 MHz, जो 1.1 MHz के करीब है।

12. आरआरबी जेई परीक्षा के लिए तैयारी के टिप्स

एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर के लिए विशेष टिप्स:

  • वर्गीकरण याद रखें: विभिन्न प्रकार के एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर, उनकी विशेषताएं और अनुप्रयोग
  • सूत्रों का अभ्यास करें: लाभ, दक्षता, आवृत्ति, और बैंडविड्थ से संबंधित सूत्र
  • सर्किट डायग्राम समझें: महत्वपूर्ण ऑसिलेटर सर्किट (हार्टले, कोल्पिट्स, फेज-शिफ्ट, वीन ब्रिज)
  • बार्कहाउजन मानदंड: दोलन के लिए आवश्यक शर्तें
  • तुलना करें: विभिन्न वर्गों के एम्प्लीफायर और विभिन्न प्रकार के ऑसिलेटर
  • पिछले वर्ष के प्रश्न हल करें: एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर से संबंधित प्रश्नों का पैटर्न समझें

अंतिम सलाह: एम्प्लीफायर और ऑसिलेटर आरआरबी जेई इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्शन के मूलभूत विषय हैं। अवधारणाओं को समझने पर ध्यान दें, रटने पर नहीं। नियमित रूप से अभ्यास करें और अपनी समझ का परीक्षण करने के लिए मॉक टेस्ट दें।

यह गाइड आरआरबी जेई परीक्षा की तैयारी के लिए तैयार की गई है। सटीकता के लिए आधिकारिक पाठ्यक्रम और संदर्भ पुस्तकों से जांच करें।

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